क्या शिक्षकों के सम्मान में कमी हो रही है ?

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शिक्षण क्षेत्र में शिक्षा देना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए तथा इस क्षेत्र से पैसा कामना दूसरी अवधारणा होनी चाहिए। जिस तरह से  आज के समय में पैसे को सर्वोपरि मानकर चलने वाला समाज शिक्षा को व्यवसाय बनाता जा रहा है उसके चलते शिक्षा में मूल्यों और आदर्शों की भारी कमी को देखा जा सकता है। शायद यह भी शिक्षकों के सम्मान में कमी का एक बड़ा कारण हो सकता है। #ThinkWithNiche

क्या शिक्षकों के सम्मान में कमी हो रही है ?

क्या शिक्षकों के सम्मान में कमी हो रही है ?

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शिक्षण क्षेत्र में शिक्षा देना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए तथा इस क्षेत्र से पैसा कामना दूसरी अवधारणा होनी चाहिए। जिस तरह से  आज के समय में पैसे को सर्वोपरि मानकर चलने वाला समाज शिक्षा को व्यवसाय बनाता जा रहा है उसके चलते शिक्षा में मूल्यों और आदर्शों की भारी कमी को देखा जा सकता है। शायद यह भी शिक्षकों के सम्मान में कमी का एक बड़ा कारण हो सकता है। #ThinkWithNiche

“मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय, यह मेरे लिए गर्व की बात होगी कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए।” सर्वपल्ली राधाकृष्णन 

5  सितम्बर, सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन जिसे संपूर्ण भारत शिक्षक दिवस के रूप में मनाता है। यह स्वयं सर्वपल्ली राधाकृष्णन की इच्छा थी की उनका जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाये। लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक दिन तक ही सीमित रहेगा। आज के समय में बहुत से ऐसे उदहारण हैं जहाँ हम विद्यार्थियों को शिक्षकों का मज़ाक बनाते हुए देख सकते हैं। जहाँ, कोरोना काल से पहले यह सब विद्यालय तक ही सीमित था, वही तालाबंदी में ऑनलाइन क्लासेज के जरिये यह सब पूरी दुनिया के सामने होने लगा।  

यह सभी चीज़ें एक ही ओर इशारा करती हैं, क्या समाज में शिक्षकों का सम्मान कम हो रहा है और यदि ऐसा है तो इसके पीछे का कारण क्या है ? क्या इसके लिए सिर्फ एक पक्ष ज़िम्मेदार है? यह कहना उचित नहीं होगा। इसके लिए छात्र जितने ज़िम्मेदार हैं उतने ही ज़िम्मेदार शिक्षक भी हैं। 

एक शिक्षक और छात्र के बीच संबंध इस तरह से होना चाहिए कि छात्र शिक्षक से कुछ भी पूछने में असहज महसूस न करे। लेकिन इसकी भी एक सीमा होनी चाहिए। वह सीमा जो शिक्षकों के सम्मान को बनाए रखती है। कहते है, कि अधिक गति और जीवन में अति, कर देती है दुर्गति, कहने का मतलब किसी भी चीज़ की अति अच्छी नहीं होती। शायद एक शिक्षक और छात्र के रिश्ते में भी यही तथ्य लागू होता है। एक शिक्षक के लिए अपने छात्रों के साथ मित्रवत व्यवहार महत्वपूर्ण है, परन्तु इसकी एक सीमा होनी चाहिए। जो छात्रों को शिक्षकों का अपमान करने से रोके। 

शिक्षकों के सम्मान में गिरावट का एक और कारण भी हो सकता है। जब कोई व्यक्ति अपनी चुनी हुई स्ट्रीम में अपना करियर नहीं बना पाता है तो वह पढ़ाना शुरू कर देता है और यह कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन एक शिक्षक होने के लिए न केवल किसी चीज का ज्ञान होना जरूरी है, बल्कि यह भी जरूरी है कि आपके पास पढ़ाने का कौशल हो। यदि आप सोचते हैं कि शिक्षण एक ऐसी चीज है जो कोई भी कर सकता है तो आप की सोच एक हद तक गलत है। शिक्षण करना कोई ऐसा कार्य नहीं जो बिना प्रशिक्षण के किया जा सकता है। इसके लिए कौशल, ज्ञान और सबसे महत्वपूर्ण धैर्य की आवश्यकता होती है। यदि आप में इनमें से किसी एक की कमी है तो एक शिक्षक और उसके छात्रों को कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है।  

वर्तमान शिक्षकों के शिक्षण के तरीके कम उचित हैं। इससे छात्रों के प्रदर्शन में नकारात्मकता देखने को मिलती है। इसका कारण छात्रों और शिक्षकों के आयु अनुपात में अंतर हो सकता है। अधिकांश लोग स्नातक के बाद शिक्षण को पैसा कमाने का माध्यम बना लेते हैं जबकि शिक्षण का स्तर इससे कई ऊपर है। यह एक ऐसी स्थिति की ओर ले जाता है जहां एक छात्र और शिक्षक का आयु अनुपात बहुत कम होता है। वे स्कूल में विभिन्न विषयों को पढ़ाना शुरू करते हैं। अब हमें यह ध्यान रखने की आवश्यकता है कि ये वे लोग हैं जिन्होंने अभी-अभी स्नातक किया है और हो सकता है कि उनके पास विषय से संबंधित कम ज्ञान हों। साथ ही शिक्षकों के पास अनुभव का भी अभाव है। वे पढ़ाने के लिए पाठ्यपुस्तकों से चिपके रहते हैं और यह पढ़ाने का सही तरीका नहीं है। कहने का तात्पर्य सिर्फ यह है कि पढ़ाने और सीखने के लिए आपके पास ज्ञान और कौशल होना चाहिए। लेकिन वर्तमान में यह कई लोगों के लिए साइड इनकम कमाने का जरिया बन गया है। 

शिक्षकों के में घटते सम्मान का एक कारण शिक्षण में इस्तेमाल हो रही नयी तकनीक भी है। लगभग सभी स्कूल नवीन तकनीकियों का उपयोग कर रहे हैं। कई शिक्षक जो नई तकनीक से परिचित नहीं हैं छात्रों के बीच मज़ाक का विषय बन कर रह जाते हैं।  इसका सबसे अच्छा उदाहरण कोविद-19 के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं हो सकती हैं। जब महामारी ने दुनिया पर प्रहार किया तो ऑनलाइन तकनीक ने शिक्षकों को शिक्षण जारी रखने में मदद की। लेकिन कई शिक्षकों को इन कक्षाओं के दौरान कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा।

छात्रों ने यह कहकर शिक्षकों को बेवकूफ बनाना शुरू कर दिया कि उनके सिस्टम में किसी तरह की समस्या है और इससे छुटकारा पाने के लिए उन्हें Alt+F4 दबाना होगा। जब शिक्षकों ने ऐसा किया तो उनका सिस्टम बंद हो गया। इतना ही नहीं कई छात्र ऑनलाइन कक्षाओं में अभद्र व्यव्हार करने से भी नहीं चुके, यह छात्रों का उचित व्यवहार नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वडियो में, एक छात्र बार-बार अपने शिक्षक के प्रति अपशब्दों को इस्तेमाल का रहा था। इसके कुछ समय बाद शिक्षक की बेटी ने एक वीडियो साझा किया जिसमें उसने बताया कि उसके पिता बेचैन रहने लगे हैं और वह क्लास लेने से भी डरने लगे हैं। जल्द ही ऑनलाइन कक्षाओं में ऐसा करने का चलन बन गया। छात्रों ने अपने शिक्षकों को ऑनलाइन कक्षाओं में ट्रोल करना शुरू कर दिया और फिर उनकी वीडियो को पूरी दुनिया के साथ साझा किया।

यह समझा जाता है कि कई शिक्षक शिक्षण के नए और अभिनव तरीकों से अवगत नहीं हैं। पर इस तरह छात्रों द्वारा शिक्षकों का मज़ाक बनाना भी उचित नहीं है। साथ ही शिक्षकों को भी नयी तकनीक से ज्यादा से ज्यादा परिचित होने की आवश्यकता है। विद्यालयों को इसके लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए। 

एक शिक्षक आपको अलग-अलग चीजें सिखाता है लेकिन आप उन चीजों को कैसे लागू करने जा रहे हैं, यह आप पर निर्भर करता है। शिक्षण क्षेत्र में शिक्षा देना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए तथा इस क्षेत्र से पैसा कामना दूसरी अवधारणा होनी चाहिए। जिस तरह से  आज के समय में पैसे को सर्वोपरि मानकर चलने वाला समाज शिक्षा को व्यवसाय बनाता जा रहा है उसके चलते शिक्षा में मूल्यों और आदर्शों की भारी कमी को देखा जा सकता है। शायद यह भी शिक्षकों के सम्मान में कमी का एक बड़ा कारण हो सकता है। 

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