बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होली

रंगों का त्यौहार होली फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। होली प्राचीन हिंदू त्यौहारों में से एक है। यह त्यौहार बसंत ऋतू के स्वागत का त्यौहार भी माना जाता है। होली में संगीत, नाच-गाना और मस्ती के बीच एक दूसरे पर रंग और पानी फेंका जाता है और यह त्यौहार न सिर्फ रंगो से जुड़ा है बल्कि यह दिलों से भी जुड़ा हुआ है। इसमें लोग भेदभाव मिटाकर दूरियों को खत्म करके एक दूसरे से जुड़ते हैं। होली में रंगों का खास महत्व है, इसमें लोग एक-दूसरे को रंग-अबीर और गुलाल लगाते हैं। होली का त्योहार इस साल 18 मार्च को मनाया जाएगा। यह त्यौहार देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है। वैसे समय के साथ यह रंगों का त्यौहार भी काफी बदल गया है। चलिए जानते हैं आज के समय में कैसे और किन रंगो से मनाया जाता है होली का त्यौहार और यह होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक कैसे है।

बुराई के अंत का प्रतीक होली

होली पर माना जाता है कि यह दिन बुराई के नष्ट होने का प्रतीक है यानि इस त्यौहार को बुराई के अंत और सच्चाई की जीत के तौर पर भी देखा जाता है इसलिए इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। दरअसल इसके पीछे एक कहानी प्रचलित है कि प्राचीन भारत का एक राजा हिरण्यकश्यप जिसका व्यवहार बिलकुल एक राक्षस के जैसे था। इसी दुष्ट राजा का एक बेटा था जिसका नाम प्रहलाद था। वह भगवान विष्णु का भक्त था। हिरण्यकश्यप इस बात से क्रोधित था कि उसका अपना बेटा उसकी पूजा न करके विष्णु की पूजा कर रहा है तब उसने अपनी बहन होलिका, जिसे ये वरदान प्राप्त था की आग उसे जला नहीं सकती, से कहा कि वो प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए। भगवान विष्णु के आशीर्वाद से उनकी योजना सफल नहीं हुई। प्रहलाद तो बच गया और होलिका जलकर राख हो गई। इसलिए भारत के कुछ राज्यों में होली से एक दिन पहले बुराई के अंत के प्रतीक के तौर पर होली जलाई जाती है। होलिका दहन के अगले दिन होली मनाई जाती है। होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में सूर्यास्त के बाद करना चाहिए यदि अगर इस बीच भद्राकाल हो तो होलिका दहन नहीं करना चाहिए। भद्राकाल समाप्त होने के बाद ही बाद ही होलिका दहन करना चाहिए। इस त्यौहार के दौरान पूरी प्रकृति और वातावरण बेहद सुन्दर और रंगीन नज़र आता है। इस पर्व को एकता, प्यार, ख़ुशी , सुख और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में जाना जाता है।

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